बिखरी डायरी
Expression of thoughts, Life Experiences, Book Reviews, Analysis and Most importantly a balance between personal life and professional life.
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स्त्री और पुरुष प्राकृतिक और शारीरिक रूप से भिन्न हैं यानि दोनों को शायद अलग-अलग जिम्मेदारी मिली है, जिससे प्रकृति और समाज को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिल सके। इन सबके साथ दोनों एक दूसरे के पूरक हैं, और शायद एक के बिना दूसरे का अस्तित्व ही नहीं है। स्त्री पुरुष न सिर्फ़…
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मां, नानी अब और रोने लगी है, उसकी हड्डियों के साथ नसे भी दिखने लगी है, पिछले महीने मिलने गया था तो पता चला अब उसका रक्तचाप भी बढ़ जाता है, हर दिन तुम्हारे पास जाने को बोलती है, हां वहीं जहां बड़े मामा, नाना और तुम चली गई बिना बताए, मैं उसको अब रोकना…
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भाग एक:- ……ऑफिस से सुबोध जब उस दिन फ़िर घर लेट पहुंचा, उसे पता था उसने दिव्या को फ़िल्म दिखाने का वादा किया है उसे यह भी पता था आज फिर से ताने मिलेंगे, गुस्से को झेलना होगा; मनाना भी पड़ेगा(एक दूसरे के साथ समय बिताने की बातों को कई दिन से टाल रहा था)…
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यह उपन्यास भारतीय मध्यम वर्ग के जीवन की सादगी और संवेदनशीलता को दर्शाता है, जिसमें कल्पना और यथार्थ के सुंदर मिश्रण से जादुई यथार्थवाद के रूप में भावनाओं को उकेरा गया है। पूरी कहानी रघुवर प्रसाद और सोनसी जो कि एक नवविवाहित जोड़े हैं, साधारण जीवन के असाधारण सौंदर्य को प्रस्तुत करने का काम लेखक…
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आजकल हर कोई सिर्फ अपनी बात कहना चाहता है, कोई किसी को सुनना नहीं चाहता। अगर सुनने का प्रयास भी करता है तो बस सुनकर टाल देना चाहता है। ज्यादातर मामलों में ऐसा ही देखा जाता है। रिश्तो के बीच सहजता और संवेदनशीलता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है, ऐसे में लोग एकाकीपन के शिकार…
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जीवन शायद कुछ और नहीं बल्कि अकेलेपन से एकांत तक की यात्रा को कहा जा सकता है। लेकिन अकेलेपन के आलिंगन का सौभाग्य भी सबको कहां नसीब होता है ? जीवन में कई बार बहुतों के होने से आपके आंखों में चमक जिंदा होती है पर वहीं वक्त के करवट लेते ही वही लोग फिर…
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जब आपके दिमाग में कुछ होता है तो आप उसे महत्वाकांक्षा कहते हैं- यह सिर्फ़ एक विचार की शुरुआत है और फिर आप अपनी सारी जीवन ऊर्जा उसमें लगा देते हैं, इस हद तक कि वह विचार आपका जीवन बन जाता है। मेरा विश्वास करें, ऐसा कोई विचार नहीं है जिसके लिए आप अपना पूरा…
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मुख्य पात्र निर्मला के जीवन के माध्यम से प्रेमचंद ने ‘द सेकेंड वाइफ’ में बाल विवाह, दहेज प्रथा और पितृसत्ता जैसी सामाजिक बुराइयों को उजागर किया है। स्वतंत्रता-पूर्व युग में लिखी डार्क फ्रिक्शन, द सेकेंड वाइफ, डेविड रुबिन द्वारा प्रेमचंद की निर्मला का अंग्रेजी अनुवाद है । प्रेमचंद ने यह उपन्यास तब लिखा जब हिंदी…
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रेत की मछली एक ऐसी कहानी है जो पाठक को मानवीय रिश्तों की जटिलता, विश्वासघात, और स्त्री की पीड़ा के गहरे अनुभवों से रूबरू कराती है। यह उपन्यास अपनी सादगी और भावनात्मक तीव्रता के कारण पाठकों को प्रभावित करता है, लेकिन इसे पढ़ना आसान नहीं है। रेत की मछली उपन्यास, कांता भारती द्वारा रचित, एक…
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इस दुनिया में सबसे बड़ा धन स्वास्थ्य धन है यदि आप स्वयं और आपके माता पिता के साथ अन्य परिवार के सदस्य पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं तो यक़ीनन आप धनी है। जितने भी लोग अपने जीवन के दूसरे चरण यानी 25-35 वर्ष के बीच हैं कोई अध्ययनरत होगा, कोई नौकरी की तलाश में, तो…
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मां के जाने के बाद बहुत शिद्दत से मैंने इस कमरे को संवारा था; कई महीनों के बाद अनगिनत यादों, विचारों और अंतर्द्वंदों को छोड़कर प्रयागराज कुछ ही दिनों पहले फ़िर से आया हूं लेकिन ये कमरा दिल और दिमाग़ में हमेशा के लिए बस चुका है। मैं जब भीज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तप…
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मुझे यह कहना कभी नहीं आया कि मैं प्रेम करता हूं या नहीं। मैंने रखा बस उसकी छोटी छोटी चीजों का ध्यानज़रूरत पड़ी तो चाय और मैगी भी बनायाट्रेन लेट हुई तो बैठा उसके साथ घंटों सीढ़ियों पर। मोबाइल के दौर में लिखे मैंने उसके लिए खत, पर्चियां चिपकाकर किया भेंट किताबों को। गुस्सा करने…
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वैसे किसी मानवीय गुण या फिर एहसास को व्यक्त करने के लिए यदि आपको किसी खास दिन या खास पल की जरूरत पड़ रही है तो निश्चित रूप से उसमें कुछ ना कुछ कमी है लेकिन यदि किसी भावना या एहसास को प्रतीकात्मक रूप में किसी से तुलना या उसको व्यक्त करने के लिए किसी…
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दोस्त होना एक जिम्मेदारी है! दोस्ती वह किरदार है जो जीवन के अन्य सभी रिश्तों को समय-समय पर निभाता है। मां की तरह निस्वार्थ होता है, पिता की तरह धवंस भी दिखाता है, बड़े भाई की तरह समझाता भी है और बहन की तरह पुचकारता भी है। पर एक दोस्त जब स्वयं के किरदार में…
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तुम आना मेरे पास, पूरा समय लेकर! मैं सिर्फ तुम्हें सुनूंगा ही नहीं बल्कि पूरा का पूरा जहन में उतार लूंगा।जिन खामोशियों से तुम्हें डर लगता है मेरे साथ वह तुम्हें अपनी लगने लगेंगी। रोने के लिए कंधा भी होगा, तुम्हारे खुद के सारे आंसू सूख न जाए इसके लिए मैं तुम्हें अपने आंसुओं से…
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सच है कि जिन चीज़ों को व्यक्त करने के लिए इस मंच का चयन किया था उसका साहस कभी जुटा ही नहीं पाया लेकिन अब 2024 पर भी मिट्टी डालने का समय आ गया है। किसी संवेदना/सहारा जैसी किसी बात का कोई उद्देश्य नहीं बस मन/मस्तिष्क में बैठे तमाम अंतर्कलहों/विचारों को अंतिम रूप से व्यक्त…
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दुनिया में अगर कुछ भी निश्चित है तो वो है मौत। ज़िंदगी कुछ और नहीं बल्कि खुद के रोने के साथ इस दुनिया में आगमन से लेकर दूसरों के रोने के साथ वापसी के बीच का सफर है। स्त्री पुरुष द्वारा संतान उत्पत्ति की चाह स्वयं की इक्क्षा होती है फिर चाहे वो संतान सुख…
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व्यक्ति के जीवन में संघर्ष कई प्रकार के होते हैं फिर चाहे वह आर्थिक हो, सामाजिक हो या फिर मानसिक। आर्थिक और सामाजिक संघर्ष को तो फिर भी दूसरों की मदद से सुलझाया जा सकता है किंतु मानसिक संघर्ष को सुलझा पाना इतना आसान नहीं। व्यक्ति के अंतर्द्वंद कभी कभी उसे इतना झकझोरते हैं कि…
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यह एक आम धारणा भी है और अनुभव भी कि औरतें मर्दों की तुलना में ज्यादा रोती हैं। जरा-जरा-सी बात पर उन्हें रोना आ जाता है। खुशी में, गम में और कई मर्तबा असमंजस में भी औरतें रोती हैं और अपने मनोभावों को व्यक्त करती हैं। लेकिन आदमी कम रोते हैं। कई बातों पर जब…