बिखरी डायरी

Expression of thoughts, Life Experiences, Book Reviews, Analysis and Most importantly a balance between personal life and professional life.

पुरुष यदि स्त्रियों की संवेदनशीलता और सहनशीलता से सीख सके,
तो उसका व्यक्तित्व और भी संतुलित एवं परिपक्व बन सकता है।

सिर्फ़ शिक्षा या धन से नहीं,
बल्कि करुणा, धैर्य और समझ से ही सच्ची मनुष्यता पनपती है।

जब पुरुष महिलाओं की दृष्टि से दुनिया देखना सीख जाता है,
तभी वह रिश्तों, समाज और जीवन के असली अर्थ को समझ पाता है

त्याग पुरुष भी करते हैं,
पर स्त्रियों का त्याग निश्चित रूप से कहीं अधिक गहन और व्यापक रहा है।
उन्होंने परिवार, बच्चों और रिश्तों के लिए
अपने जीवन की अनेक महत्वाकांक्षाएँ सहजता से त्याग दी हैं।
ऐसे उदाहरणों में पुरुषों की संख्या बहुत कम दिखाई देती है।

असली पुरुषत्व बाहुबल के प्रदर्शन में नहीं,
बल्कि उस कोमल ममत्व में छिपा होता है।
जहाँ शक्ति का संगम संवेदना से हो,
वहीं पुरुष का सौंदर्य सबसे अधिक दमकता है।

जब उसके हृदय में दया और करुणा का विस्तार हो,
तो वह केवल बलशाली नहीं, बल्कि मानवीय भी कहलाता है।
वह अपने सामर्थ्य से नहीं,
अपनी सहृदयता से लोगों के दिल जीत लेता है।

©Himsudha

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