जीवन शायद कुछ और नहीं बल्कि अकेलेपन से एकांत तक की यात्रा को कहा जा सकता है।
लेकिन अकेलेपन के आलिंगन का सौभाग्य भी सबको कहां नसीब होता है ?
जीवन में कई बार बहुतों के होने से आपके आंखों में चमक जिंदा होती है पर वहीं वक्त के करवट लेते ही वही लोग फिर आपके तमस भरे जीवन में माचिस की एक लौ भी जलाने में सक्षम नहीं होते।
अंत में आपको अपने जीवन का दीपक स्वयं ही बनना पड़ता है और सही/गलत का मूल्यांकन करते हुए नए रास्ते अपनाने पड़ते हैं।
यह ध्यान रखना कि आप किस दौर से गुज़रे हैं,
कैसे इसने आपकी मानसिकता को समय समय पर मज़बूत किया यह आपको नकारात्मक मस्तिष्क चक्र से बाहर निकाल सकता है और आपको उन कमज़ोर, एक-सेकंड के आवेगों को दरकिनार करने में मदद कर सकता है।
भले ही आप अभी जीवन से निराश और पराजित महसूस कर रहे हों।
मैं कह सकता हूं कि आप एक या दो बार ऐसे समय के बारे में सोच सकते हैं जब आपने बाधाओं को पार किया फ़िर चाहे वह छोटी बाधाएं क्यों ही न रही हो। ऐसे में बड़ी बाधाओं से निकलने का मार्ग यहीं से प्रशस्त होगा।
जीवन की वास्तविक समझ के साथ आपको यह पता चलता है कि असल में आपकी प्रतिस्पर्धा किसी और या बाहरी परिवेश से नहीं बल्कि आपके स्वयं से है।
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