आजकल हर कोई सिर्फ अपनी बात कहना चाहता है, कोई किसी को सुनना नहीं चाहता।
अगर सुनने का प्रयास भी करता है तो बस सुनकर टाल देना चाहता है। ज्यादातर मामलों में ऐसा ही देखा जाता है।
रिश्तो के बीच सहजता और संवेदनशीलता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है, ऐसे में लोग एकाकीपन के शिकार हो रहे हैं, उनके जीवन में खुशियां भी कम हो रही है और अवसाद भी बढ़ता जा रहा है।
भागते दौड़ते जीवन के बीच व्यक्ति को अपने सार्वजनिक जीवन के विभिन्न आयामों यानि नौकरी पेशा, पढ़ाई या अन्य व्यवसाय के साथ व्यक्तिगत जीवन के बीच सामंजस्य बैठाना ही होगा। सुख दुख जीवन का हिस्सा है अगर सुख में अत्यधिक चढ़ाव और दुख में अत्यधिक गिरावट आई तो आपकी ऊर्जा और उत्पादकता दिन ब दिन कम होती जाएगी।
ध्यान रखिए, जीवन में आपके अपने सच्चे लोग जो सच में आपके सुख दुख में साथ रहते हैं वो कठिन समय में सहारा देते हैं तो अच्छे समय में आपका आंकलन करने में मदद।
इसलिए कुछ चुनिंदा अच्छे लोगों की संगति में जरूर रहिए, जहां सुकून हो, हंसी हो और आपका बचपन भी जिंदा रहे।
साथ ही साथ यह जीवन जीने के लिए मिला है उसे किसी प्रकार से नष्ट करने के लिए नहीं।
हर व्यक्ति की अपनी क्षमताएं और प्रतिभाएं अलग-अलग होती हैं आपको यह पहचानना होगा कि आप किस काम के लिए बने हैं और किस कार्य को करते हुए आप अपना शत प्रतिशत दे रहे हैं और उससे आपको खुशी मिल रही है।
जीवन के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलिए और बिना किसी से तुलना किए हुए खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहिए।
बिखरी डायरी
Expression of thoughts, Life Experiences, Book Reviews, Analysis and Most importantly a balance between personal life and professional life.
recent posts
about
Posted in Uncategorized
Leave a comment