तुम आना मेरे पास, पूरा समय लेकर!
मैं सिर्फ तुम्हें सुनूंगा ही नहीं बल्कि पूरा का पूरा जहन में उतार लूंगा।
जिन खामोशियों से तुम्हें डर लगता है मेरे साथ वह तुम्हें अपनी लगने लगेंगी।
रोने के लिए कंधा भी होगा, तुम्हारे खुद के सारे आंसू सूख न जाए इसके लिए मैं तुम्हें अपने आंसुओं से सहयोग दूंगा।
अपना हुनर तुम उनको दिखाना जिन्हें कलाबाजी/कलाकारी सिर्फ़ देखने में पसंद है।
मैं देखूंगा इस हंसने हंसाने के क्रम में खुद के मज़ाक बनाएं जाने की तमाम वजहों को।
तुम आना पूरा समय लेकर,
मैं तुम्हें ले चलूंगा समुद्र किनारे उस शांत लहरों के बीच जहां पत्थरों पर बैठे हम दोनों के साथ एक दूसरे की खामोशियां होंगी।
©Him

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